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Saturday, September 25, 2010

4 जी टेक्नोलॉजी

4 जी टेक्नोलॉजी
हाल ही में ट्राई ने भारत में 9 टेलीकॉम कंपनियों को थ्रीजी स्पेक्ट्रम की नीलामी के योग्य पाया। नीलामी प्रक्रिया पूरा होने बाद ये कंपनियाँ 1 सितंबर से अपना काम शुरू कर देंगी। ज्ञातव्य हो भारत में थ्रीजी सेवा के प्रसार में ही काफी विलंब हो चुका है जबकि कई देशों में कंपनियाँ फोर्थ जनरेशन तकनीक को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने में लगी हुई हैं।

हालाँकि ट्राई ने थ्रीजी सुविधा के देरी पर खेद व्यक्त करते हुए बिना देर किए फोर जी सेवा लाने के बारे में विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। आइए जानते हैं क्या है 4जी तकनीक :-

फोर जी तकनीक यानी फोर्थ जनरेशन मोबाइल। इसे फोर्थ जनरेशन कम्युनिकेशन सिस्टम के नाम से भी जाना जाता है। इसमें वाइस डाटा और मल्टीमीडिया उपभोक्ताओं को कभी भी कहीं भी प्राप्त हो सकेगा। इस तकनीक में डाटा ट्रांसफर का रेट इससे पूर्व की जनरेशन की तुलना में बहुत ज्यादा होगा।

फोर जी तकनीक की डाटा रे
अभी सेकंड जनरेशन के मोबाइल में डाटा रेट 9.6 केबी/से. स्टैंडर्ड स्पीड जो सामान्य तौर पर विभिन्ना कारणों से कम ही होती है। 4जी मोबाइल डाटा ट्रांसमिशन की दर 20 मेगाबाइट प्रति सेकंड की दर से प्लान की गई है। इसका मतलब है कि यह स्पीड स्टैण्डर्ड एएसडीएल सर्विस से दस से बीस गुना तेज होगी।

यह तकनीक अच्छी क्वालिटी और हाई सिक्युरिटी दे सकती है। थ्रीजी मोबाइल का वर्तमान डाटा रेट 2 मेगाबाइट्स प्रतिसेकंड है।


इस समय 2जी टेक्नालॉजी (जीएसएम) विश्व स्तर पर व्यापक तौर पर उपयोग की जा रही है। पर 2जी तकनीक की यह सबसे बड़ी कमी है कि इसमें डाटा रेट बहुत धीमी है। इसलिए यह तकनीक, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वीडियो और म्यूजिक डाउनलोडिंग के लिए उपयुक्त नहीं है।

थ्रीजी तकनीक भी 2 एमबी/से ही डाटा ट्रांसफर कर सकती है लेकिन 4 जी तकनीक 100 एमबी/से. की दर से डाटा ट्रांसफर करती है। आने वाले समय में मोबाइल तकनीक में भी और तरक्‍की की उम्‍मीद है। आगे सारा वि‍श्व ही मोबाइल में समा जाएगा। 1जी यानी फर्स्‍ट जनरेशन मोबाइल ने वि‍श्व को मोबाइल तकनीक से परि‍चि‍त कराया।

1990 के दशक में 2जी मोबाइल से डि‍जीटल फॉर्मेट आया। इससे टेक्‍स्‍ट मैसेज की शुरुआत हुई। 3जी तकनीक ने डाटा ट्रांसफर को आसान कि‍या। 4जी तकनीक में आप 3जी तकनीक की तुलना में कुछ ज्‍यादा फीचर पाएँगे जैसे कि‍ मल्‍टीमीडि‍या, न्‍यूजपेपर, स्‍पष्टता के साथ टीवी प्रोग्राम देखना और तेज गति‍ से डेटा ट्रांसफर हो जाना इत्‍यादि‍।

4 जी टेक्नोलॉजी के बारे में :
4 जी तकनीक पूरी तरह आई-पी इंट्रीग्रेटेड सिस्टम पर आधारित होगी।

यह 100 एमबी/से. से 1 जीबी /से. तक स्पीड देने में सक्षम होगी।

4 जी मोबाइल वर्तमान 2 जी मोबाइल से 200 गुना और 3 जी मोबाइल से लगभग 10 गुना तेज होंगे।

इस तकनीक से सभी तरह की सेवाएँ वहन कर सकने योग्य कीमत में प्राप्त होंगी।

यह तकनीक, उच्च स्तर की सेवाएँ जैसे कि वायरलेस ब्रॉडबैंड एक्सेस, मल्टीमीडिया मैसेजिंग, वीडियो चैट, मोबाइल टीवी और वीडियो ट्रांसमिशन जैसी सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम होंगी।
आभारी h.w.d

वायरलेस राउटर

आपके चलने से चार्ज होगा मोबाइल, लैपटाप

वाशिंगटन। आप मानें या न मानें लेकिन निकट भविष्य में कुछ मिनट तक चलने फिरने से ही आप अपने मोबाइल, लैपटाप और आईपॉड को चार्ज करने में सक्षम हो सकेंगे। यह पीजोइलेक्ट्रिक्स की मदद से संभव होगा।

जार्जिया टेक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस प्रकार के उपकरण के निर्माण का दावा किया है जो चलने फिरने से ही पीजो इलेक्ट्रॉनिक्स सामग्री से आवश्यक विद्युत उर्जा की आपूर्ति करने की क्षमता रखते हैं।

डिस्कवरी चैनल ने अनुसंधानकर्ताओं के हवाले से खबर दी है कि पीजोइलेक्ट्रिक्स 1.26 वोल्ट तक बिजली उत्पन्न कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इससे भी अधिक वोल्टेज उर्जा पैदा करने में सक्षम हैं।

सह अनुसंधानकर्ता जेड एल वांग ने कहा ‘भविष्य के लिए उपयोगी प्रौद्योगिकी के विकास की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।’

वांग ने कहा ‘हर कदम से, हर चाल से आप बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। पैदा होने वाली विद्युत उर्जा को और अधिक बढ़ाया जा सकता है जो आईपाड और मोबाइल फोन के लिए आवश्यक होगी।’

केवल पीजो इलेक्ट्रिक पदार्थों की विद्युत उर्जा से संचालित विश्व का यह पहला उपकरण वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। तीन वर्ग सेंटीमीटर के दायरे में 20 हजार नैनोवायर को जोड़कर वैज्ञानिकों ने यह उपकरण तैयार किया है।

पीजोइलेक्ट्रिक पदार्थ वैसी सामग्रियाँ हैं जो दबाने या खींचे जाने पर हल्की विद्युत उर्जा उत्पन्न करती हैं।
आभारी (wd)

Friday, September 24, 2010

अब आप बच सकते है, मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन से


मोबाइल फोन का अधिक इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को मोबाइल फोन से उत्सर्जित रेडिएशन के सम्पर्क में रहने का खतरा बना रहता है. कभी कभी यह रेडिएशन सामान्य होता है परंतु कभी कभी इसका स्तर खतरनाक हो सकता है. अब एक ऐसी अप्लिकेशन बनाई गई है जो रेडिएशन का स्तर खतरनाक मानक तक पहुँचते ही प्रयोक्ता को चेतावनी दे देती है.
इज़रायल की एक कम्पनी टॉकोन ने यहअप्लिकेशन बनाई है जो ब्लैकबेरी और गूगल एंड्रोइड फोनों पर चलती है. जल्द ही इसका सिम्बीयन संस्करण भी जारी किया जाएगा. यह अप्लिकेशन मोबाइल द्वारा उत्सर्जित रेडिएशन पर नजर रखती है और ना केवल प्रयोक्ता को चेतावनी देती है बल्कि रेडिएशन कम करने की सलाह भी देती है.

उदाहरण के लिए आजकल के कई मोबाइल फोनों में एंटिना नीचे के भाग में होता है. अब यदि प्रयोक्ता का हाथ उस पर लम्बे काल तक रहे तो सिग्नल कमजोर होने लगते हैं और मोबाइल अधिक मात्रा में रेडिएशन फैलाने लगता है. रेडिएशन जब अमुक स्तर से अधिक हो जाता है तो यह अप्लिकेशन एक चेतावनी फ्लेश करती है कि रेडिएशन बढ रहा है फोन को नीचे की तरफ झुका लें.

आम तौर पर मोबाइल को 90 डिग्री के कोण घुमा दिए जाने से रेडिएशन कम होने लगता है. इस कम्पनी के सीइओ का कहना है कि हम नहीं चाहते कि लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना छोड़ें, हम चाहते हैं कि वे सही तरीके से इस्तेमाल करें.

Tuesday, September 21, 2010

सर्फिंग के दौरान सावधानी रखिये नहीं तो हो सकता है नुकशान

नेट सर्फिंग के दौरान अक्सर आपका सामना अवांछित ऑफर्स से हो ही जाता है। इतना ही नहीं चैटिंग के दौरान भी चीटिंग करने वाले फालतू मेल भी आते रहते हैं। लेकिन इनसे सावधान रहने की जरूरत है, नहीं तो दोस्ती करने, कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करने या लुभावने ऑफर के साथ वायरस भी आ धमकते हैं। इस तरह के मेल से आए वायरस आपके कम्प्यूटर काम तमाम कर सकता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप नेट सर्फिंग के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखें...

  •  नेट इस्तेमाल के दौरान अगर कोई आपको फालतू की चीजें मेल करे, तो खोलने या जवाब देने से परहेज करने के अलावा ऐसे मेल या ऐप्लिकेशंस को आप ब्लॉक भी कर सकते हैं। अनजाने ईमेल के साथ आए अटैचमेंट के रूप में ही सबसे ज्यादा वायरस आने का खतरा रहता है। आजकल कई ऐसे सॉफ्टवेयर हैं, जो अवांछित मेल को रोकते हैं। ऐसे सॉफ्टवेयर अपने कंप्यूटर पर लोड करके उसे खतरों से बचाया जा सकता है। वैसे कई ई-मेल प्रोवाइडर भी यह सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।
  • नेट सर्फिग के दौरान सुरक्षित रहने का एक जरूरी मंत्र यह है कि अपने पूरे नाम, सही पते, फोन नंबर और बैंक खाते से संबंधित सूचना नए और अनजान मित्रों से शेयर न करें। अपने फोटोग्राफ को भी सीमित दायरे में इस्तेमाल की छूट दें। नेट पर बने किसी भी मित्र से पहली मुलाकात अकेले न करें। इसमें कोई खतरा हो सकता है।
  • इन दिनों बहुत सी साइट्स आपसे पुरस्कार, सर्वेक्षण, रजिस्ट्रेशन के बहाने निजी सूचनाएं और ईमेल का पासवर्ड मांगती हैं, इनसे चौकस रहें। दरअसल, इसमें बहुत सी ऐसी हैं जो ईमेल डाटा एकत्र कर विज्ञापनदाताओं को बेचती हैं। ऑनलाइन शापिंग के कारोबार से जुड़ी साइट्स भी ऐसा करती हैं। इनसे सावधान रहने में ही भलाई है। एमएसएन के एक सर्वे के मुताबिक, यूरोप के 51 परसेंट टीनएजर्स बिना सोचे समझे साइट खंगालते हैं। इसके लिए यूरोप के 14 से 19 साल के बीच के 20 हजार युवाओं के बीच किए गए सर्वे से यह बात सामने आई है। 
  • नेट इस्तेमाल में खतरों को देखते हुए गूगल बज और फेसबुक सहित कई सोशल साइटों ने जानकारी को सीमित आधार पर शेयर करने का विकल्प अपने उपभोक्ताओं को दिया है। नेट पर सुरक्षित रहने के मामले में इंटरनेट एक्सप्लोरर ही आपका बेहतर मददगार है। इसके लिए आपको सैटिंग को सुरक्षित करना होगा।

  •   आप इंटरनेट एक्सप्लोरर के टूल्स पर क्लिक करें, इसके खुलने पर नीचे इंटरनेट ऑप्शंस पर क्लिक करें। इसके खुलने पर कंसोल ऑप्शन में जाकर सिक्योरिटी टैब पर क्लिक करें। सिक्योरिटी जोन में एक्टिव स्क्रिप्टिंग के लिए- इंटरनेट, लोकल इंटरनेट या स्ट्रिक्टिड पर जाकर विकल्प चुनें। बेहतर सुरक्षा के लिए कस्टम लेवल का चयन करें। ऑपशन में एक्टिव एक्स कंट्रोल और प्लग-इन्स को डिसेबल कर दें। इससे कुछ साइट्स का ठीक से काम करना प्रभावित होता है।
  •  इन दिनों फायर फॉक्स, गूगल क्रोम और एवीजी का फ्री वायरस प्रोटेक्शन आपके लिए मददगार हो सकता है। पॉपअप ब्लाक रख कर भी आप अनचाहे विज्ञापनों और सूचनाओं से छुटकारा पा सकते हैं।  
  •  एंटीवायरस का इस्तेमाल करें और उसे लगातार अपडेट करते रहें।

  •  थर्ड पार्टी को कुकीज डालने की छूट पर रोक लगाएं।

  •  अपने कंप्यूटर का महत्वपूर्ण डाटा अलग डिस्क या सीडी में सेव करते रहें।

  •   जब इस्तेमाल न कर रहे हों तो इंटरनेट कनेक्शन को डिसकनेक्ट करना न भूलें।

  •  किसी साइबर कैफे में जाएं तो अपनी टैंपरेरी इंटरनेट फाइलें उड़ाना न भूलें।

  •  किसी फाइल को डाउनलोड करने से आपके अपने अपडेटेड एंटी वायरस की कसौटी पर उसे परख लें। यह भी सुनिश्चित करें कि डाउनलोड की जाने वाली ऐप्लिकेशन सिक्योरिटी सर्टिफाइड अथॉरिटी से अनुमोदित हो। मसलन, यह वेरी साइंड से प्रमाणित हो तो इससे आप आश्वस्त हो सकते हैं। ऐसी ऐप्लिकेशंस जिनमें कोई सिक्योरिटी सर्टिफिकेट न हो आपके कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल को नुकसान पहुंच सकता है।
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नेट सर्फिंग में सुरक्षाइंटरनेट सर्फिग के दौरान हमेशा सावधान रहना चाहिए
, नहीं तो ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ वाला फार्मूला अपने रंग दिखाना शुरू कर देगा। न जाने किस साइट से और किस मेल के रूप में वॉयरस आपके कंप्यूटर को हानि पहुंचा दे, इससे हर कदम पर सावधान रहने की जरूरत है।


हालांकि सर्फिग के दौरान जो सामान्य सर्चइंजन और साइट्स आप इस्तेमाल करते हैं उनकी तरफ से भी अपनी साख और ग्राहकी बनाए रखने के लिए काफी इंतजाम किए जाते हैं। साखदार सर्च इंजन में तो नुकसान की आशंका वाली हर घातक साइट के बारे सूचना आपको दे दी जाती है कि यह साइट आपके कंप्यूटर को हानि पहुंचा सकती है। ऐसे में यह आप पर है कि उन साइट्स के आकर्षक होने और उपयोगी लगने पर भी आप संकट में फंसने से खुद को बचाएं।

पॉपअप ब्लॉक करें: इसी तरह पॉपअप के जरिए या थर्ड पार्टी डिमांड को बाधित करके भी आप अपने कंप्यूटर लैपटॉप और मोबाइल को हानिकारक साइटों के प्रकोप से बचा लकते हैं।

फिशिंग फिल्टर: एक अन्य उपाय यह है कि आपके इंटरनेट एक्सप्लोरर पर फिशिंग फिल्टर की व्यवस्था रहे, जिससे हर खुलने वाली साइट या नेट पन्ने के फालतू पॉपअप से आप अपने कंप्यूटर को सुरक्षित रख सकें।

लोकप्रिय नामों से बचें : हाल ही में कैटरिना और एसआरके जैसे नामों की खोज के दौरान हानिकारक वॉयरस ने बहुत से कंप्यूटरों को अपना निशाना बनाया था। यह वॉयरस इतना खतरनाक था उसने पूरी हार्डडिस्क क्षतिग्रस्त कर दी। गूगल की गलत स्पैलिंग या एमएसएन से मिलते-जुलते नाम से धोखा देते सर्चइंजन भी ईसर्फिग के दौरान हानि पहुंचाने का काम कर सकते हैं। इनसे परहेज करना चाहिए।
आकर्षण गेम्स : देखने में आया है कि ज्यादातर कंप्यूटरों में बेहद लुभाते गेम्स, लुभावने चित्रों और एडल्ट मैटिरियल में रुचि दिखाने के दौरान लोगों के कप्यूटर में खतरनाक वायरस आया। इनसे बचने में ही भलाई है।

रक्षक बने भक्षक: इंटरनेट सर्फिग के दौरान आपके कंप्यूटर को हानिकारक वॉयरस से बचाने का दावा करते पॉपअप भी सामने आते हैं। ये आपके कंप्यूटर को खतरे में बताते हुए संकटमोचक के रूप में एंटीवॉयरस प्रोग्राम मुफ्त डाउनलोड करने का न्योता देते हुए अवतरित होते हैं। इस बारे में हमारी सलाह यही है कि इनका कतई भरोसा न करें। ये आपके कंप्यूटर को हैक करने का काम भक्षक बन कर करते हैं।
आभारी c7i & Goggle आपका समीर

पढ़ने के बाद खुद मिट जाएगा एसएमएस

पढ़ने के बाद खुद मिट जाएगा एसएमएस



मोबाइल संदेशों को लेकर मुसीबत झेल चुकीं कई प्रसिद्ध हस्तियों के लिए एक नई प्रौद्योगिकी राहत लेकर आई है। इसमें संक्षिप्त संदेश सेवा (एसएमएस) एक बार पढ़ने के बाद खुद मिट जाएगा। इस नई सेवा का नाम 'सेफ टेक्स्ट' रखा गया है। एक स्थानीय

समाचार पत्र 'टेलीग्राफ' के अनुसार आगिल्वी एडवरटाइजिंग ने यह सेवा विकसित की है। कंपनी का कहना है कि एक दिन हर कोई 'सेफ टेक्स्ट' की सुविधा लेगा। कंपनी अपनी सेवा के साथ यह चेतावनी भी देती है कि उपयोगकर्ता के पास एमएमएस पढ़ने का

सिर्फ एक मौका है।

फ्रीवेयर, शेयरवेयर, ट्रायल, बीटा और ओपन सोर्स (मुफ्त सॉफ्टवेयर)

इंटरनेट पर कई तरह के सॉफ्टवेयर मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं। इनकी तीन-चार प्रमुख श्रेणियां हैं जिन्हें हम फ्रीवेयर, शेयरवेयर, ट्रायल, बीटा और ओपन सोर्स के रूप में जानते हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, फ्रीवेयर पूरी तरह निशुल्क और बिना शर्त उपलब्ध कराए जाने वाले सॉफ्टवेयर हैं। शेयरवेयर नामक सॉफ्टवेयर एक निर्धारित अवधि तक पूरी तरह नि:शुल्क इस्तेमाल किए जा सकते हैं। उस अवधि में वे पूरी तरह सामान्य सॉफ्टवेयर की भांति काम करते हैं, लेकिन अवधि बीतने पर वे निष्क्रिय हो जाते हैं। सॉफ्टवेयरों को इस रूप में जारी करने का आशय है कि आप उन्हें खरीदने से पहले आजमा लें।

कुछ सॉफ्टवेयरों के ट्रायल वर्जन भी निशुल्क डाउनलोड किए जा सकते हैं, जैसे एडोब फोटोशॉप या पांडा एंटीवायरस। इन्हें भी कर सकते हैं। उसके बाद कुछ सॉफ्टवेयर तो पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं, जबकि कुछ (जैसे नॉर्टन एंटीवायरस) अपेक्षाकृत कमजोर फीचर्स के साथ काम जारी रखते हैं। सॉफ्टवेयर की दुनिया में ‘बीटा’ वर्जन का नाम बहुत सुना जाता है। बीटा सॉफ्टवेयर को मुफ्त दिए जाने का उद्देश्य उनका बड़े पैमाने पर परीक्षण करना है। प्राय: किसी सॉफ्टवेयर के पूर्ण संस्करण के बिक्री हेतु जारी होने से पहले कुछ अवधि के लिए उसका बीटा संस्करण उपलब्ध कराया जाता है। इस दौरान लोग उसे इस्तेमाल कर उसकी कमियों और संभावित सुधारों के बारे में अपने विचार संबंधित कंपनी को भेज सकते हैं। इस क्रिया में दोनों पक्षों को लाभ होता है। जहां आईटी कंपनियों को वास्तविक योक्ताओं का फीडबैक मिलता है, वहीं उपभोक्ता किसी अच्छे सॉफ्टवेयर को लांच होने से पहले ही, और मुफ्त में इस्तेमाल कर पाते हैं।

जहां तक ओपन सोर्स सॉफ्यवेटरों का संबंध हैं, वे पूरी तरह नि:शुल्क दिए जाने वाले सॉफ्टवेयर हैं जिन्हें प्रमोट करने के लिए इंटरनेट पर बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाइनेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के अधिकांश सॉफ्टवेयर ओपन सोर्स के रूप में विकसित किए गए हैं। विंडोज, मैक और अन्य ऑपरेटिंग सिस्टमों के लिए भी ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर लाखों की संख्या में उपलब्ध हैं। ये फ्रीवेयर की ही तरह होते हैं, इनके फीचर्स या अवधि संबंधी कोई सीमा नहीं होती।
आभारी c7i

आ गया मोबाइल हैकर.. ज़रा बचके

आ गया मोबाइल हैकर 
सावधान मोबाइल पर की जा रही आपकी पर्सनल बातें कोई चोरी छिपे सुन सकता है। वह आपकी बातों से मिली जानकारी के आधार पर आपके एकाउंट से पैसे निकाले की फिराक में है। इसका मतलब है, आपका मोबाइल डेंजर जोन में है। दरअसल बात हो रही है, मोबाइल हैकरों की, जिनकी नजर आपके बैंक अकाउंट्स पर है। वह धोखे से आपसे जानकारी लेकर आपके ही एकाउंट्स से पैसे निकाल लेगा और आपको जब तक खबर लगेगी, वह रफूचक्कर हो जाएगा।


गौरतलब है कि देश में हर महीने 1.5 करोड़ मोबाइल खरीदे जाते हैं। इसलिए अब क्राइम की दुनिया में कंप्यूटरों के बाद मोबाइल फोन हैकरों की चांदी होने वाली है। दरअसल इन हैकरों को हाई वैल्यू डेटा स्टोरेज ने ललचाया है। चूंकि आजकल हम अपने पासपोर्ट नंबर, बैंक अकाउंट नंबर जैसे हाई वैल्यू डेटा फोन पर स्टोर करने लगे हैं, इसलिए हैकरों की निगाह कंप्यूटर से हटकर फोन पर टिक गई है। टेक्निकली कंप्यूटर की तुलना में मोबाइल को हैक करना ज्यादा आसान है, क्योंकि हम इनकी सुरक्षा को लेकर लापरवाह हैं। एक्सपर्ट्स की राय में इन हैकरों के निशाने पर स्मार्टफोन के साथ-साथ आम फोन भी हैं।

एंटी वायरस सॉफ्टवेयर बनाने वाली सिमेन्टेक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना है कि अभी तक मोबाइल पर हमला करने वाले 400 तरह के वायरस और नुकसान पहुंचाने वाले सॉफ्टवेयर की खोज हो चुकी है। कंप्यूटर के चार लाख वायरसों की तुलना में भले ही यह मामूली संख्या लगे, लेकिन इनसे खतरा उतना ही है। इन खतरों में शामिल स्मिशिंग, प्रैंकिंग, स्नूपवेयर, ब्लूजैकिंग और ब्लूस्नार्फिंग। स्मिशिंग के तहत हैकर एसएमएस या एमएमएस के साथ एक लिंक भेजता है। इसे क्लिक करने पर मोबाइल में वायरस इन्स्टॉल हो जाता है।

प्रैंकिंग में हैकर हैंडसेट पर पहले वायरस भेजता है। इसके बाद हैकर इस हैंडसेट से किसी वेबसाइट पर प्रीमियम एसएमएस भेजकर बैंक या क्रेडिट एकाउंट से पैसे विद-ड्रॉ कर लेता है। स्नूपवेयर सॉफ्टवेयर की मदद से हैकर स्मार्टफोन की कॉन्टेक्ट लिस्ट, एसएमएस को कॉपी करने से लेकर बातचीत तक सुन सकता है। वह आपका कैलंडर देखकर अंदाजा लगा सकता है, कि आपकी कौन सी बातचीत सुनने लायक है। ब्लूजैकिंग में ब्लूटूथ का इस्तेमाल करके हैकर किसी भी ब्लूटूथ वाले सेट पर एसएमएस या एमएमएस भेज सकता है। ब्लूस्नार्फिंग में भी ब्लूटूथ का इस्तेमाल होता है। इसके सहारे हैकर आपके मोबाइल में स्टोर जानकारी तक पहुंच रखने लगता है।

मोबाइल हैकिंग से बचने के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि सिमेन्टेक, कैस्परस्काई लैब जैसी एंटी वायरस बनाने वाली कंपनियां इनसे निपटने के उपाय सोच रही हैं। फिलहाल मोबाइल यूजर्स के लिए यह सुझाव है कि वह सावधानी बरतें, कंप्यूटर की तरह मोबाइल में पासवर्ड का इस्तेमाल करें। जरा सी भी असामान्य हरकत होते देख सावधान हो जाएं और मोबाइल चैक कराते रहें

ओपन सोर्स क्या है?.. देखिये

ओपन सोर्स क्या है?

 देखिये
आजकल लाइनेक्स, युबुंटु, मीगो, फेडोरा जैसे सोर्स कोड के साथ कई अच्छे ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) फ्री मिल रहे हैं। ओपन सोर्स का मतलब है कि सॉफ्टवेयर के साथ सोर्स कोड भी रिलीज किया जाए। कोई भी इस कोड को मॉडीफाई कर सकता है और अपने मुताबिक कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर तैयार कर सकता है। गूगल एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर लाइनेक्स पर आधारित है और अपने विरोधी ओएस को कड़ी टक्कर दे रहा है। युबुंटु को www.ubuntu.com से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐसे ही कुछ और ओपन सोर्स ऑल्टर्नेटिव हैं :

पॉपुलर सॉफ्टवेयर ओपन सोर्स ऑल्टरनेटिव

अडोब अक्रोबेट रीडर okular (http://okular.kde.org/download.phd)

अडोब पेजमेकर Scribus (http://www.scribus.net/)

अडोब फोटोशॉप CinePaint (http://www.cinepaint.org/)

ड्रीमवीवर KompoZer (http://www.kompozer.org)

फोन्टोग्राफर FontForge (http://fontforge.sourceforge.net/)

माइक्रोसॉफ्ट फ्रंटपेज Quanta Plus (http://quanta.kdewebdev.org/)

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस OpenOffice (http://openoffice.org/)

माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक (एक्सप्रेस):-

Thunderbird (http://www.mozillamessaging.com/enUS/thunderbird/)

माइक्रोसॉफ्ट प्रोजेक्ट kplato (http://koffice.org/kplato/)

एमएसएन मेसेंजर पिडगिन Pidgin (http://pidgin.im)

नीरो बर्निंग रोम X-CD-Roast (http://www.xcdroast.org/)

विनैम्प ऑडेशियस (http://audacious-media-player.org/Main_Page)

विंडो मीडिया प्लेयर KPlayer (http://kplayer.sourceforge.net/)

 वीएलसी प्लेयर (http://www.videolan.org/vlc/)

विनजिप-7 ZIP (http://www.7-zip.org)

 अगर आप इन सॉफ्टवेयर्स का इस्तेमाल करते हैं तो आपको पेड सॉफ्टवेयर की जरूरत नहीं होगी। ये काफी अच्छे हैं। इनमें पेड सॉफ्टवेयर के जैसे बेहतर फीचर बेशक न हों, लेकिन इन टूल्स की मदद से प्रफेशनल काम किया जा सकता है।

सोर्सः एनबीटी

गूगल की नई सर्विस गूगल ‘इंस्टेंट’

दुनिया की जानी मानी सर्च इंजन कंपनी गूगल ने इंस्टेंट-सर्च सर्विस की शुरुआत कर दी है। गूगल ने अपनी इस नई सर्विस में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिससे गूगल पर एक शब्द को टाइप करने के बाद ये सर्च इंजन खुद ही आपको आगे के शब्दों का ऑप्शन देने लगेगा। यानी एक तरह से इस तकनीक के जरिए आपके दिमाग को पढ़ने की कोशिश की जाएगी। इतना ही नहीं इस सर्विस का इस्तेमाल करते हुए आपको शब्द टाइप करने के बाद ‘एंटर-की’ दबाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। गूगल के मौजूदा सर्च ऑप्शन में किसी शब्द को पकड़ने में 9 सेकेंड का वक्त लगता है और कई बार तो ये समय 30-40 सेकेंड तक पहुंच जाता है।

गूगल इंस्टेंट से ये काम 3 सेकेंड जल्दी पूरा हो जाएगा। फिलहाल दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा लोग रोजाना गूगल सर्च इंजन का इस्तेमाल करते हैं। यानि की अब हर दिन हजारों घंटे के समय की बचत होगी। अमेरिका में गूगल इंस्टेंट सर्विस शुरू कर दी गई है और इसी हफ्ते है ये सर्विस ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और रूस में शुरू कर दी जाएगी। वहीं अगले हफ्ते इसे दुनिया बाकी देशों में भी शुरू कर दिया जाएगा। गूगल इंस्टेंट को क्रोम, फायरफॉक्स, सफारी और इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा।